Thursday, November 19, 2009

मेरी डायरी का पहला पन्ना

डायरी जो ज़ुबान होती है दिल की,
कह देती है बहुत कुछ बिन कहे ही,
सोचा मैने भी
लिख डालू मै भी
कुछ बातें जो न कह पाऊँगी
कभी तुमसे
हाँ कभी भी
शायद तुम भी कभी
अकेले में सोच रहे होंगे
क्या कहना था मुझे
शायद न पढ़ पाओगे तुम कभी
मेरी तनहाई,मेरी बेचैनी
न ही पढ़ पाओगे
मुझे क्या चाहिये तुमसे
क्या तुम दे पाये।
बीते दिनो का लेखा जोखा सभी कुछ
न लिख पाऊँ मगर
लिख ही दूँगी वे जरूरी बातें
जो मुझे तुमसे कहनी थी।

14 comments:

Murari Pareek said...

rachanaa to sundar hai !!par aap hain kon rekhaji???

Udan Tashtari said...

बीते दिनो का लेखा जोखा सभी कुछ
न लिख पाऊँ मगर
लिख ही दूँगी वे जरूरी बातें
जो मुझे तुमसे कहनी थी।


-सुन्दर!! लिख डालिये!!

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

good poem,keep writing,blog jagat mey aapka hardik swagat hai ,
sasneh ,
dr.bhoopendra singh
jeevansandarbh.blogspot.com

महावीर बी. सेमलानी said...

सुंदर कविता !
शुभ मंगल !

वाणी गीत said...

जरुर लिखिए ...इन्तजार रहेगा ...!!

रश्मि प्रभा... said...

स्वागत है इस बेहतरीन रचना के साथ

Avtar Meher Baba said...

बहुत खूबसूरत लिखा है आपने...मुबारक..स्वागत है आपका
ब्ळोग की दुनिया में

सादर
चन्दर मेहेर

lifemazedar.blogspot.com

गिरिजेश राव said...

अगले पन्ने की प्रतीक्षा है।
नियमित और सार्थक लेखन के लिए शुभकामनाएँ।

______________

वर्ड वेरिफिकेशन क्यों लगा रखा है?

uthojago said...

welcome

वन्दना अवस्थी दुबे said...

स्वागत है

नारदमुनि said...

---- चुटकी----

राहुल थके
प्रियंका ने
चलाई कार,
अब तो
यह भी है
टीवी लायक
समाचार।

अजय कुमार said...

हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी टिप्पणियां दें

कृपया वर्ड-वेरिफिकेशन हटा लीजिये
वर्ड वेरीफिकेशन हटाने के लिए:
डैशबोर्ड>सेटिंग्स>कमेन्टस>Show word verification for comments?>
इसमें ’नो’ का विकल्प चुन लें..बस हो गया..कितना सरल है न हटाना
और उतना ही मुश्किल-इसे भरना!! यकीन मानिये

Dr. shyam gupta said...

झांक लेते तुम अगर भीगे नयन में,
जान लेते पीर मन की प्यार मन का ।

अबयज़ ख़ान said...

आपने चंद लाइनों में ही बहुत कुछ लिख दिया.. लिखने को कुछ और भी हो तो लिख डालिए.. बेकरारी का बहुत खूबसूरत बयान है ये.. लाजवाब